
ज़िन्दगी की शुरुवात ही न जाने कितनी ख्वाइशों से शुरू होती है , कुछ महलों में सजती है तो कुछ मुफलिसी में , लेकिन ज़िन्दगी जहाँ भी हो कई उम्मीद लेकर आती है , किसी की किस्मत में सारा आसमा है तो किसी की किस्मत में रत्ती भर की ज़मीं भी नहीं ? ज़िन्दगी फ़िर भी हर हाल में मुस्कुराती है ...
तमाम मुश्किलें ... तमाम रास्ते है ... कहीं रास्ते आसां है ॥ कहीं मुश्किलें ज़ियादा भी है लेकिन ये ज़िन्दगी है ...जो बस चलती रहती है कहीं खुशियों का समंदर खारा सा लगता है तो कहीं एक बूंद सी खुशी समंदर सी लगती है , छोटी छोटी सी खुशियों से कहीं आशियाना सा बनता दीखता है और कहीं बड़े बड़े आशियाने में छोटी सी खुशियाँ भी नहीं दिखती ...आख़िर क्या है ये ज़िन्दगी ???
कभी कहीं सड़क के किनारे किसी शख्स को देखा है ठिठुरती ठंड में एक छोटी सी चादर लिए जिससे उसके पैर बाहर की तरफ निकले हुए चैन की नींद सो रहा है ...खाब उसके भी होंगे एक नई सुबह की ॥ जो उसकी तकलीफों को कुछ कम कर सके ... हसरतें अभी मरी नहीं है ...कहीं किसी कोने में छुपा कर के रखी है ...शायद तलाश है उसे अपने किसी की ... जिससे वो बयां करे ...
एक रात ये भी है ..रौशनी से नहाई हुई है ... सेकडों की भीड़ ... लेकिन कुछ तनहा से लग रहे है... खुशामिजाज़ी का मंज़र भी है ...शानोशौकत में कुछ कमी नहीं है ...शायद खुशियों की कुछ कमी तो नहीं सी लगती है ...सब कुछ पा लिया लगता है ... फ़िर भी ज़िन्दगी से बहुत तमन्नाएँ अभी बाकी है ...और एक रात की सुबह का मंज़र कुछ ऐसा होगा कभी सोचा ना था ...ज़िन्दगी तलाश रही है बिखरे हुए कचरे के ढेर में ज़िन्दगी ...आख़िर क्या है ये ज़िन्दगी ???