Saturday, May 24, 2008

आई पी एल का दर्द !!!!!!!





आई पी एल की शुरुवात जिस गर्मजोशी से की गई थी ,अंजाम भी कुछ इसी तरह का सोचा गया था लेकिन जिस तरह से स्टार टीमे सेमी फाईनल तक नही पहुच सकी है इससे टीम के मालिको का दर्द साफ झलकता है !

कभी सोचा नही था की विजय माल्या अपनी टीम को हारते हुए दखे तो उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी ? किंग खान बिना कुछ कहे सब कुछ कहना चाहते है लेकिन खेल के चक्कर मे वो अपनी हीरो वाली छवि को धूमिल भी नही करना कहते है ,

चाहे कुछ भी हो लेकिन टीम के मालिको का दर्द साफ झलकता है और हो भी न क्यों आख़िर करोडों का सवाल जो है , इस क्रिकेट ने अगर धनकुबेरो के माथे मे पसीना ला दिया है वही खिलाड़ियों की साख भी कम हुई है , सवाल ये है की जिन खिलाड़ियों को इस देश मे भगवन की तरह पूजा जाता है वो सरे बाज़ार ख़ुद को नीलाम कर दिए , बोली लगती रही और क्रिकेट के भगवन बिकते रहे , करोडों के भाव भी मिले , लेकिन जब प्रदर्शन की बारी आई तो शुन्य ???
अब इनपर करोडों खर्च करने वाले इन्हे कुछ बुरा भला कहे तो क्या ग़लत कहे ? आखीर आप को इन्होने ख़रीदा है ये आप के मालिक है बुरे प्रदर्शन मे बुरा बर्ताव तो लाज़मी है ?
वेसे ई पी एल २० -२० से बीसीसीआई को ये तो ज़रुर समझ मे आ गया होगा के पुराना बदल दो और नया ले जाओ ??? क्रिकेट के इस खेल को देश की गरिमा से जोड़ने वाले कम से कम इन नए और उभरते हुए खिलाडियों को देखकर ख़ुद को गोरवान्वित तो मह सुस करेंगे ????

5 टिप्पणियाँ:

सागर नाहर on May 25, 2008 at 7:33 AM said...

और इस के जरिये बी सी सी आई, बूढ़े शेरों को आसानी से टीम से बाहर निकाल सकेगा, अगर इससे पहेल अगर सौरव, सचिन या द्रविड़ को टीम से निकालने की बात की जारी तो जनता नाराज हो जाती। बंगाल में दंगे हो जाते।
अब BCCI के पास बढ़िया तर्क है कि हमने IPL के प्रदर्शन के आधार पर इन्हें बाहर निकाला है।
बढ़िया लेख!
हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, आप हिन्दी में बढ़िया लिखें और खूब लिखें यही उम्मीद है।

एक अनुरोध है कृपया यह वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें, यह टिप्पणी करते समय बड़ा परेशान करता है।

॥दस्तक॥
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल

Mrs. Asha Joglekar on May 25, 2008 at 2:13 PM said...

स्वागत है हिन्दी चिट्ठा जगत में ।बहुत सही लिखा है आपने । ये मिट्टी के शेर तभी निकाले जयेंगे जब पैसे का नुकसान होगा चाहे वो सितारों का हो या B C C I का । जैसे सागर जी ने कहा
निकाल दीजीये अगर टिप्पणी चाहते हैं ।

दिनेशराय द्विवेदी on May 26, 2008 at 7:11 AM said...

आप भी जनता का उस की समस्याओं से ध्यान हटाने के तंत्र में ही उलझे हैं। आज जनता परेशानी में है। जरा उस के बारे में लिखिए।
ब्लागजगत में आप का स्वागत हैं।

शोभा on May 26, 2008 at 8:40 AM said...

अच्छा और विचार प्रधान लेख है। सोचने को प्रेरित करता है। wyynx

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ on May 28, 2008 at 3:01 AM said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। आपने धन्ना सेठों की दुखती रग पर उंगली रखी है। बधाई।
और हाँ एक निवेदन- कृपया कमेंट बॉक्स से वर्ड वेरीफिकेशन हटा दें, इससे इरीटेशन होती है।

 

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