Tuesday, July 15, 2008

काजल की कोठरी ???



देश आज जिस राजनैतिक अनिश्चिताओं के दौर से गुज़र रहा है , इन्ही सब के बीच ये भी ख़बर आ रही है के सरकार बचाने के लिए यू.पी.सांसदों की खरीद फरोख्त में लगा हुआ है ? ये कह रहे है ए.बी.वर्धन !
क्या सच में हमारे देश के संसद बिकाऊ है ? क्या उन्हें ख़रीदा जा सकता है ? हालाँकि एक बार टीवी पर देखा था कुछ लेते -लेते , लेकिन सभी ऐसे होंगे ? कुछ नही भी , काजल की कोटरी में काला होना तो लाज़मी है ? लेकिन वर्धन साहब ने कहा है तो कुछ सोच समझ कर ही कहा होगा ? उनका पुराना तजुर्बा हो सकता है ???
लेकिन अगर ये सच है तो ये सच, सच में बहुत ही शर्मनाक है ? देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अगर बिकाऊ हो जायेंगे तो देश का क्या होगा ? और वेसे भी देश की फिकर है भी किसको ?अगर एक सांसद बिकता है तो वह किस श्रेणी में आता है ..देश द्रोह या देश हित ? बिका तो सरकार बच सकती है ? चुनाओ का भोझ गरीब जनता पर न पड़े हो सकता है इसका ख़याल सांसद जी को हो ? एक बात तो है हमारे देश मैं सब कुछ बिकाऊ है बस इन्तेज़ार है तो एक अच्छे खरीददार की , जो हमे खरीदते हुए अपने बदन में कोई कैमरा ना छुपा रखा हो ???
लेकिन ये तो सच है की जिस तरह से ये खबरें आ रही है कि सरकार बचने के लिए सांसदों कि खरीदी कि जा रही है , कुछ सांसदों को तो जेल से भी निकला जा रहा है एक वोट के लिए , जिन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है, ये देश कि गन्दी राजनीति का एक चहरा है ? पता नहीं इस दलगत राजनीति के और कितने चहरे दिखेंगे ?लोकतंत्र की ये मिसाल एक काजल की कोटरी बन के रह गया है ? अब इसमें कुछ साफ़ सुत्रि छवि के लोग भी होंगे तो इससे खुद को कैसे बचायेंगे ???

1 टिप्पणियाँ:

SHUAIB on July 18, 2008 at 10:27 PM said...

आपके विचार पढकर अच्छा लगा, आप खुद को समझने की कोशिश मे हैं। इतना समझलें आप इंसान हैं और भारतिय हैं सभी पाबंदीयों से आज़ाद नागरिक।

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