Sunday, August 10, 2008

भोक्वाये ब्लागर कृप्या ध्यान दें .....



1. क्या आप के ब्लॉग को कोई नहीं पढ़ रहा है ?



२ क्या पढ़ने के बाद कोई टिपण्णी नहीं कर रहा है ?



३ क्या आप को लगने लगा है के आप को लिखना नहीं आता है ?
४ क्या आप को लगता है के आप से अच्छा स्त्रियाँ लिखती है ?



५ क्या आप को लगता है के सारी टिप्पणियाँ स्त्रियाँ ही ले जा लेती है ?



६ क्या आप सोचते है के आप स्त्री होते तो ही अच्छा होता ?
७ क्या आप सारा गुस्सा की बोर्ड पर ही उतार रहे है ?
८ क्या आप हीन भावना से ग्रस्त हो रहे है ?



९ क्या आप को किसी को काटने का मन करता है ?



१० क्या आप भोक्वा गए है ???



*** ऐसे लोग निराश ना हो ? तुंरत मिले ...किससे ? ...डाक्टर राज ...डाक्टर साहनी ...डाक्टर मुल्की ...से नहीं भाई साहब ... किसी दुसरे भोक्वाए ब्लागर से ...और अपने मन की ज्वाला ठंडी कर लें ...सुना है के बदन में जब आग लगी होता है तो पता नहीं धुवाँ कहाँ कहाँ से निकलता है ? एक दुसरे को टिपण्णी देकर पिछवाड़े में पानी डालिए ...



*** इससे भी रहत न मिले तो एक और नुस्खा है मेरे पास ? अब मैं कौन ??? मैं भोक्वा राम रहीम बिना मुछी दाढ़ी का मुल्ला ... बिना धोती कुरते का पंडित ...नाच न जानू और आँगन टेढा ... फोकट में सलाह बाट्ता भूके पेट ही सो जाता ...नुस्खा लो .....



१ नर से बन जाओ तुम नारी ...लिंग अपना स्त्री कर लो ...



२ सोलह सोलह श्रृंगार करके ...अपनी छवि को जोड़ लो ...



३ सेक्स सेक्स की बाते लिखना ...मर्दों को तुम गली बकना ...



४ बिना कुछ जाने पहचाने ... किसी के फटे में टांग आड़ाना .

५ कर लेना तुम सब को वश में ... बुड्ढों की भी टिपण्णी पाना ...


६ एक से चार चार तक ... सारे खम्बो को हिलाना ...


७ और कभी अगर दुखती नस पर ...हाथ तुम्हारे रखदे तो ...


८ असंसदीय भाषाओं से ... उसका बैंड बजा देना ...


९ क्या बुड्ढे क्या यूवा ... सब तेरा साथ निभाएंगे ...


१० एक एक करके ये सारे .... खूब टिप्पणीयाँ करते जायेंगे ....

खूब टिप्पणीयाँ करते जायेंगे .....खूब टिप्पणीयाँ करते जायेंगे ...............

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नोट :- बाप भाई लोग ... नाराज़ नहीं होनेका है ... खाली टाइम में कोई काम नहीं था तो ये बकवास कर डाली ... बुरा नहीं मानने का है ..ठीक .... इंजॉय सन्डे ...

13 टिप्पणियाँ:

बालकिशन on August 10, 2008 at 7:10 AM said...

वाह जी वाह बढ़िया नुस्खे बताये आपने.
आभार.
(अब हमें कौन रोक सकता है?)
:) :) :)

राज भाटिय़ा on August 10, 2008 at 8:39 AM said...

अनवर मिंया, अजी कहे गुस्सये जा रहे हे, नर कॊ नारी बना रहे हे, नही भाई अपन के बस के तो नही आप के नुस्खे... ना बाबा ना हम बिना टिपाये ही भले.

अनूप शुक्ल on August 10, 2008 at 10:08 AM said...

अच्छा ज्ञान दिया। लेकिन अमल बड़ा कठिन है भाई!

curious on August 10, 2008 at 10:42 AM said...

असंसदीय भाषाओं से ... उसका बैंड बजा देना ...

ये असंसदीय भाषा क्या होती है? संसद में तो जहाँ तक मुझे ज्ञान है 'हर भाषा' और हर गाली चलती है.

Anwar Qureshi on August 10, 2008 at 11:01 AM said...

आदरणीय टिपण्णी देव ...दंडवत प्रणाम ...ये उन भोक्वाए ब्लागर के लिए है जिन्हें टिप्पणियां नहीं मिलती है जिनके हिस्से की सारी टिप्पणियां महिला प्रधान देश की महिलायें ही ले जाती है ...

P. C. Rampuria on August 10, 2008 at 11:15 AM said...

नत मस्तक हैं बंधू आपके सामने !
प्रणाम स्वीकार कीजिये !

Anil Pusadkar on August 10, 2008 at 11:43 AM said...

anwar miyan bade chhupe rustam nikle tum to.mazaa aa gaya

डा. अमर कुमार on August 10, 2008 at 2:41 PM said...

.


लगता है कि आज श्रीमान जी को ज्ञानोदय हुआ है,
या किसी ब्लागर का जिन्न सर पर चढ़ कर बोल रहा है..

अनुराग on August 11, 2008 at 6:59 AM said...

जी गुरुवर.

Anwar Qureshi on August 11, 2008 at 9:05 AM said...

ध्यान देने के लिए सभी भोक्वाए भाइयों का धन्यवाद ...

सतीश सक्सेना on August 11, 2008 at 9:42 AM said...

कड़वी सच्चाई लिखी है आपने, बहुत अच्छा और तीखा लिखते हो !

Neetesh said...

हा हा हा......... अच्छा लिखा.......... :)

महामंत्री-तस्लीम on August 12, 2008 at 3:33 AM said...

बहुत बढिया, मजा ही आ गया।

 

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