Tuesday, February 16, 2010

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जब जुनू हो मंजिल को करने का हासिल...
मील के पत्थर से कोई दोस्ती करता नहीं..... !

Thursday, February 11, 2010

b.j.p में केंद्रीय नेतृत्व परिवर्तन,छत्तीसगढ़ में रमन संकट ?

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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब बी.जे.पी में चाल, चरित्र और चेहरा बदलने की कवायत तेज़ हो गयी है जिसके चलते बी.जे.पी ने सबसे पहले वो चेहरे ही बदल डालें है जिनकी वजह से पिछले चुनाव में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा है, पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवानी किनारे कर दिए गए है वहीँ पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भी बहार का रास्ता दिखा दिया गया है नए अध्यक्ष के रूप में संघ के नजदीकी माने जाने वाले नितिन गडकरी अब पार्टी की कमान संभालेंगें ! देश के आठ राज्यों में बी.जे.पी.या उसके समर्थन से सरकारें चल रही है, बात अगर छत्तीसगढ़ की की जाये तो छत्तीसगढ़ में बी.जे.पी की ये दूसरी पारी है, और दूसरी बार भी मुख्यमंत्री रमन सिंह ही है, रमन सिंह पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के काफी करीबी रहे है राजनाथ के रहते रमन सिंह की कुर्सी हिलाने की कोशिश पार्टी के ही सांसद और विधायको ने खूब की लेकिन रमन सिंह पर राजनाथ का हाथ रहते उनकी एक न चली ! कभी आदिवासी राज्य होने का हवाला देते हुए पार्टी के आदवासी विधायक आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग पर अड़े रहे, तो कभी रमन सिंह के खिलाफ एक हुए ये आदिवासी विधायकों ने आदिवासी एक्सप्रेस के नाम से मुहीम छेड़ी और स्वर्ण मुख्यमंत्री का विरोध किया दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता व सांसद रमेश बैस ने भी ओ.बी.सी कार्ड खेला लेकिन रमन सिंह की कुर्सी को हिलाने में नाकाम रहे, बस्तर के सांसद बलीराम कश्यप ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाते रहे लेकिन इन सब के बावजूद आला कमान की नज़रों में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह छाए रहे और मुख्यमंत्री की खिलाफत करने वाले छत्तीसगढ़ बी.जे.पी के सभी बड़े नेताओं के हाथ मायूसी ही लगी ! लेकिन बी.जे.पी की कमान अब गडकरी के हाथों पर है और लम्बे समय से बंद पड़ी इस मुहीम को फिर से हवा मिली है पार्टी में नाराज़ चल रहे नेता एक बार फिर से रमन सरकार को संकट में ला सकते है? रमन सिंह के लिए भी अब तस्वीर कुछ बदली हुई है पहले रमन सिंह के साथ खड़े राजनाथ अब दूर नज़र आ रहे है कहीं ये न हो के मुख्यमंत्री विरोधी लहर छत्तीसगढ़ की राजनीती में एक नया मोड़ ला दे ? दूसरी तरफ पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए भी इस चुनौती से निपटना मुश्किल हो सकता है एक तरफ तो पार्टी के बड़े नेता है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की साफ़- सुत्री छवि ! ये देखना दिलचस्प होगा की राजनीती के इस खेल में शय और मात आखिर किसकी होती है !!

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