Monday, August 25, 2008

कलंकित गाँधी !!!




छत्तीसगढ़ की राजनीती की नई खरपतवार बन कर उभरे राजनांदगाव के पूर्व सांसद , या यूँ कहिये की संसद में सवाल पूछने के बदले घुस लेते रंगे हाथ पकड़े गए व पार्टी से निष्कासित किए गए माननीय सांसद प्रदीप गाँधी जी की पार्टी में पुनः वापसी हो गई है , शायद पार्टी को ये लगता है की उन्होंने अपने कार्यकाल में जो उल्लेखनीय कार्य किए है उनका फायदा पार्टी को हो सकता है ,
इस कलंकित गाँधी के राजनैतिक जीवन की बात की जाए तो ये बड़ा ही उतार चढाव भरा रहा , पहली बार डोंगर गावं से विधायक बने प्रदीप गाँधी ने बलिदानी होने का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी , रमन सिंह भी पीछे नहीं रहे उन्होंने आशीर्वाद सवरूप प्रदीप गाँधी को राज नांदगावं लोकसभा की टिकिट थमा दी , गाँधी जी की किस्मत इतनी बुलंद थी की वो सांसद भी बन गए , सपना था ...केन्द्र में मंत्री बनने का ? लेकिन क्या करें ...किस्मत फ़िर पलट गई ...माननीय सांसद जी इस बार स्टिंग ओपरेशन का शिकार हो गए ...फ़िर क्या था ...टी.वी.में घुस लेते दिख जाने के बाद
उनका राजनितिक जीवन मिस्टर इंडिया की तरह गायब हो गया !!!
लेकिन इस दूसरी पारी में मिस्टर गाँधी नए तेवर नए कलेवर में नज़र आ रहे है , छोटी कद काठी , गठीला बदन , माथे में तिलक , और मुह में पार्टी के लिए निष्ठा से भरे शब्द !
प्रदीप गाँधी को उनकी इस दूसरी पारी में पार्टी ने उन्हें चुनाव नियंत्रण कक्ष का प्रभारी बनाया है , हलाँकि इसके लिए गाँधी जी को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी है लेकिन फ़िर भी किसी तरह कलंकित गाँधी अब पार्टी में है , पार्टी इतना तो ज़रूर जानती है की हमाम में सब नंगे है लेकिन उसे ये भी पता है की जिसकी नंगी तस्वीर छप जाए उसे ही असली नंगा कहा जाता है !
चलिए ये तो हुई एक कलंकित गाँधी की ..देश में एसे ना जाने कितने गाँधी है जिनकी अभी तक कोई नंगी तस्वीर नहीं छापी है , और वो समाज में सफ़ेद पोश नकाब ओढे हुए लोकतंत्र को बेच रहे है ? और बेचते ही रहेंगे ..जब तक हम नहीं जागेंगे ...जब तक हमारे देश को ये भूलने बिमारी से छुटकारा नहीं मिलेगा तब तक इस तरह के गाँधी पैदा होते रहेंगे ..हमे इस तरह की बेवजह हुई खरपतवार को जड़ से उखाड़ फकने की ज़रूरत है ज़रा सोचिये ....
*** अनवर कुरैशी द्वारा जनहित में जारी .....

8 टिप्पणियाँ:

अफ़लातून on August 25, 2008 at 4:20 AM said...

आप सही कह रहे हैं ।

हरि on August 25, 2008 at 5:32 AM said...

जनहित में आपकी पोस्ट उल्लेखनीय है। बधाई।

हरि on August 25, 2008 at 5:32 AM said...

जनहित में आपकी पोस्ट उल्लेखनीय है। बधाई।

राज भाटिय़ा on August 25, 2008 at 8:12 AM said...

ओर हम वेबकुफ़ो की तरह से फ़िर भी इन्हे वोट देते हे ? क्यो नही हमारा दिमाग का करता,ऎसे नंगो को सब मिल कर क्यो अपना अन दाता बनाते हे, बार बार जीताते हे क्यो, गलती जनता की हे , इन्हे सर पर हम बिठाते हे,जागो ओर भगाओ इन चोर उच्चको को.

सचिन मिश्रा on August 25, 2008 at 2:26 PM said...

Bahut Khub

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन on August 25, 2008 at 9:54 PM said...

"माथे में तिलक , और मुह में पार्टी के लिए निष्ठा से भरे शब्द
शायद ऐसों के लिए ही कहा गया है, "मुख में राम बगल में छुरी!"

PREETI BARTHWAL on August 26, 2008 at 3:40 AM said...

ऐसे नेताओँ की कमी नही है लेकिन ये भी सच है कि जब तक सामने न आये तब तक साधू । ऐसे नेता को जिताने वाले भी हम ही हैं। आपका लेख अच्छा लगा।

महेंद्र मिश्रा on August 27, 2008 at 7:21 AM said...

apke vicharo se sahamat hun. badhai.

 

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