Friday, August 29, 2008

मुझे श्रधांजलि दीजिये ...

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जन्म -३०.०८. 80 से ... ... ...
अत्यंत दुःख के साथ ये सूचित करना पड़ रहा है की मैं अनवर कुरैशी आत्मज ...श्री ए जे कुरैशी , का आज के दिन जीवन का एक महत्त्वपूर्ण वर्ष और कम होने जा रहा है ,
इस दुखद समय में आप सभी ब्लागर साथियों के निवेदन है आप सभी इस ब्लॉग में आकर मेरी जीवित आत्मा को शान्ति पहुंचाएं ...और इश्वर से प्राथना करे की मेरा बाकी का बचा हुआ जीवन किसी के काम आ सके ....
शोकाकुल ...
अनवर कुरैशी
रायपुर { छ.ग }
नोट :- सभी ब्लागर साथयों से निवेदन है की टिपण्णी पश्चात् भोजन की व्यस्था स्वयं के घर पर है कृप्या भोजन उपरांत ही प्रस्थान करे ..धन्यवाद ...

Monday, August 25, 2008

कलंकित गाँधी !!!

8 टिप्पणियाँ


छत्तीसगढ़ की राजनीती की नई खरपतवार बन कर उभरे राजनांदगाव के पूर्व सांसद , या यूँ कहिये की संसद में सवाल पूछने के बदले घुस लेते रंगे हाथ पकड़े गए व पार्टी से निष्कासित किए गए माननीय सांसद प्रदीप गाँधी जी की पार्टी में पुनः वापसी हो गई है , शायद पार्टी को ये लगता है की उन्होंने अपने कार्यकाल में जो उल्लेखनीय कार्य किए है उनका फायदा पार्टी को हो सकता है ,
इस कलंकित गाँधी के राजनैतिक जीवन की बात की जाए तो ये बड़ा ही उतार चढाव भरा रहा , पहली बार डोंगर गावं से विधायक बने प्रदीप गाँधी ने बलिदानी होने का परिचय देते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी , रमन सिंह भी पीछे नहीं रहे उन्होंने आशीर्वाद सवरूप प्रदीप गाँधी को राज नांदगावं लोकसभा की टिकिट थमा दी , गाँधी जी की किस्मत इतनी बुलंद थी की वो सांसद भी बन गए , सपना था ...केन्द्र में मंत्री बनने का ? लेकिन क्या करें ...किस्मत फ़िर पलट गई ...माननीय सांसद जी इस बार स्टिंग ओपरेशन का शिकार हो गए ...फ़िर क्या था ...टी.वी.में घुस लेते दिख जाने के बाद
उनका राजनितिक जीवन मिस्टर इंडिया की तरह गायब हो गया !!!
लेकिन इस दूसरी पारी में मिस्टर गाँधी नए तेवर नए कलेवर में नज़र आ रहे है , छोटी कद काठी , गठीला बदन , माथे में तिलक , और मुह में पार्टी के लिए निष्ठा से भरे शब्द !
प्रदीप गाँधी को उनकी इस दूसरी पारी में पार्टी ने उन्हें चुनाव नियंत्रण कक्ष का प्रभारी बनाया है , हलाँकि इसके लिए गाँधी जी को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी है लेकिन फ़िर भी किसी तरह कलंकित गाँधी अब पार्टी में है , पार्टी इतना तो ज़रूर जानती है की हमाम में सब नंगे है लेकिन उसे ये भी पता है की जिसकी नंगी तस्वीर छप जाए उसे ही असली नंगा कहा जाता है !
चलिए ये तो हुई एक कलंकित गाँधी की ..देश में एसे ना जाने कितने गाँधी है जिनकी अभी तक कोई नंगी तस्वीर नहीं छापी है , और वो समाज में सफ़ेद पोश नकाब ओढे हुए लोकतंत्र को बेच रहे है ? और बेचते ही रहेंगे ..जब तक हम नहीं जागेंगे ...जब तक हमारे देश को ये भूलने बिमारी से छुटकारा नहीं मिलेगा तब तक इस तरह के गाँधी पैदा होते रहेंगे ..हमे इस तरह की बेवजह हुई खरपतवार को जड़ से उखाड़ फकने की ज़रूरत है ज़रा सोचिये ....
*** अनवर कुरैशी द्वारा जनहित में जारी .....

Saturday, August 23, 2008

लूट सको तो लूट लो ...

6 टिप्पणियाँ


फोकट का सामन है भैय्या ,


लूट सको तो लूट लो !


खुली हुई दूकान है भैय्या ,


लूट सको तो लूट लो !!


ना इसमें कोई मिर्च है , ना है कोई मसाला ,


ना अखछर की पहचान है इसमें !


ना शब्दों की वर्ण माला ,


बिखरा हुआ सामन है भैय्या ,


लूट सको तो लूट लो !!


गुमसुम गुमसुम चुप बैठा है ,


कोई नहीं है सुनने वाला !


कूड़ा करकट दान है भैय्या ,


लूट सको तो लूट लो !!


सोने की चिड़िया के तुमने ,


पर क़तर डालें है ,


भारत का तुम भोग हो करते ,


और नेता कहलाते हो ,


काब तक लूटोगे देश को ,


मेरा कहा अब मान लो ,


पूरा पाकिस्तान पड़ा है ,


लूट सको तो लूट लो ......

Thursday, August 21, 2008

पत्नी केयर टेकर पति उसका मालिक ?

9 टिप्पणियाँ

स्त्री के अनेक रूप हम सभी ने अपने जीवन में देखे है , माँ , बहन , पत्नी , बेटी , ये सभी पात्र पुरूष के जिवन से होकर कभी ना कभी ज़रूर गुज़रते है , और ये सभी जीवन में एक विशेष महत्व रखते हैं , स्त्री हमेशा से ही बलिदान का वो चहरा रही है जिसने हालात के साथ ना जाने कितने समझौते किए है , बेटी रही तो पराई रही , पत्नी हुई तो बहु बन गई , और माँ बन कर बच्चों के भविष्य के लिए समझौते !

पुरूष प्रधान समाज में आज भी स्त्री की जगह उस कोने में है जहाँ से सिर्फ़ झाँका जा सकता है या किन्ही फैसलों को सुना जा सकता है चुप्पी साधे हुए , जहाँ उन्हें फैसलों को मानने की बाध्यता होती है , बिना उनकी बात सुने बगेर , ये हालत भारत के उस सत्तर प्रतिशत छेत्र में है जहाँ ग्रामीण आबादी बस्ती है ,
पुरूष के जिवन का एक पात्र { पत्नी, वैसे सभी पात्र प्रभावित करते है } वास्तव में प्रभावित करने वाला है , पराई बेटी से जब पत्नी बनके किसी पुरूष के जिवन में प्रवेश करती है साथ ही वह बहु कहलाने लगती है तब परिवार की सारी जिम्मेदारियों का भोझ भी उस अबला नारी पर ही होता है , कुल मिलकर परिवार से लेकर पति तक केयर टेकर की भूमिका में पत्नी होती है जिसका मालिक उसका पति होता है ?

वैवाहिक जिवन में पुरूष को वो सारे संवैधानिक अधिकार प्राप्त होते है जिसमे पत्न्नी द्वारा पति को वो सारे सुख जिसकी वो अपेक्षा रखता है नहीं मिलने पर पत्नी को प्रताड़ित किया जा सकता है या यूं कहिये मानसिक रूप से विकलांग पुरूष अपनी नंपुसकता का परिचय देते हुए पत्नी को प्रताड़ित करता है , जिसमे पत्नी की भूमिका सहने मात्र की होती है , अपने मूल अधिकारों से अज्ञान स्त्री !

दूसरी तरफ़ हालत कुछ बदले बदले से है भारत चाहे वो तीस प्रतिशत आबादी जो शहरों में बस्ती है अपने अधिकारों से पुरी पुरी तरह वाकिफ है , वो पीछे नहीं साथ मिलकर चलना चाहती है ...कुछ तो मर्दों से आगे भी निकल गई है , कभी मर्दों के नीचे दबी कुचली औरत अब मर्दों के ऊपर आने लगी है , ये विश्वास उन महिलाओं में है जो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है , जो किसी भी रूप में मर्दों से पीछे नहीं है , वो कंधे से कन्धा मिलकर चलना चाहती है ,

बड़ी ही अजीब विडंबना है , जिस देश में स्त्री को देवी की तरह समझा जाता है और उसकी पूजा की जाती है उसी देश में स्त्री घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है , या फिर के टोनही होने के शक में उसे पुरे गावं में नंगा करके घुमाया जाता है , किसी ना किसी बहाने से स्त्री पर अत्याचार होता रहता है ॥लेकिन स्त्री अपने होटों को सिले सारे अत्याचारों को सहती रहती है

इक्कीसवीं सदी में भी समाज या के पुरुष की सोच में स्त्री के प्रति कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है शहरी छेत्रों को छोड़ दिया जाये तो ग्रामीण इलाकों में आज भी स्त्री को पुरुष अपनी खरीदी हुई जागीर समझता है , अपने अधिकारों से अनजान स्त्री प्रताड़ना का शिकार होते रहती है लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता है ,

समाज की नज़र से देखा जाये तो स्त्री "पत्नी " की भूमिका पुरुष "पति " के लिए एक केयर टेकर की होती है जिसका मालिक उसका पति होता है !!!

Sunday, August 17, 2008

मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहता हूँ !!!

13 टिप्पणियाँ



पापा कहते है बड़ा नाम करेगा , बेटा हमारा ऐसा काम करेगा , ...मगर ये तो कोई न जाने के मरी मंजिल है कहाँ ....


इस गीत को जिस किसी ने भी लिखा है सच में बहुत खूब लिखा है , हर पिता का सपना होता है के उसका बेटा पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बने , खूब नाम कमायें , कोई डाक्टर कोई इंजिनियर या कोई बिज़नेसमेन बने , मेरा भी एक सपना है .... मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहता हूँ ...





अब आप सोच रहे होंगे की मैं माधुरी दीक्षित ही क्यों बनना चाहता हूँ ???...माधुरी दीक्षित को देश का बच्चा बच्चा जानता है , हर किसी के दिलों की धड़कन है माधुरी दीक्षित , फ़िल्म जगत में उन्होंने खूब नाम कमाया है , यहाँ तक के उनके नाम की फ़िल्म तक बन गई है ....मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ ... विदेशों तक उनके नाम का चर्चा है उनके नाम से न जाने कितने उत्पाद बिकते है और मुनाफा काटते है , जिनके नाम पर कसीदे पढ़े जाते है वो माधुरी अगर मैं बनना चाहता हूँ तो इसमें हर्ज ही क्या है ?








दूर जाने की ज़रूरत नहीं है हमारे देश में ही देख लीजिये ....हमारे देश के महान चित्रकार, जिनका है विवादों से सरोकार, जिनकी उम्र है सत्तर के पार , फिर भी माधुरी के नाम से उनके दिल में बजती है गिटार , मकबूल फ़िदा हुसैन साहब ...जब माधुरी दीक्षित को अपने दिल से लेकर अपने केनवास में जगह दे सकते है तो इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की माधुरी दीक्षित की क़द्र करने वालों की कमी नहीं है ,





धक...धक ...करके दिल धड़काने वाली माधुरी दीक्षित का जीवन सही मायने में सफल जीवन है , बॉलीवुड में अपने नाम का परचम लहराने वाली ये अदाकारा अपने निजी जीवन में भी एक सफल नारी है , इसमें कोई दो राये नहीं है , उनके समझदारी भरे इस फैसले से भले ही देश के नव जवानों के दिलों को ठेस पहुंची है लेकिन माधुरी का जीवन एक सफल जीवन है ,








अब आप ये सोच रहे होंगे के मैं ...गाँधी ॥नहरू या भगत सिंग क्यूँ नहीं बनना चाहता हूँ ??? क्यूँ भाई साहब मरवाना चाहते हो क्या ? इनके विचारों की कद्र करने वाला कोई रह गया है क्या ? आज अगर इन सब की बात सामाजिक रूप से की जाये तो लोग बहरूपिया समझते है , मज़ाक बनाते है , कहते है देखो ... आ गया ... आदर्शों की बात करने वाला ... गाँधी की छठी औलाद ?हलाँकि ये ओहदा बेहद गर्व पहुँचने वाला है ...लेकिन क्या करे १० की भीड़ में खुद को अकेला महसूस करते है , कौन सुनेगा हमारी बात ...अब किसी को इसमें भी हमारी कोई कमजोरी ढूननी है तो ये ही सही ....








लेकिन ज़रा सोचिये ....अगर सच में ये माधुरी दीक्षित का ब्लाग होता तो क्या होता ? कितने लोग इसे चाहने वाले होते ? कितने लोग हर बात पर वाह वाह करते ? कितनी टिप्पणियां भेजते ? मगर ये क्या ये किसी माधुरी दीक्षित का ब्लाग थोडेही न है , ये तो अनवर कुरैशी का ब्लाग है .... इसलिए .........मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहता हूँ ...

Saturday, August 16, 2008

देश की बदलती राजनीति की नई तस्वीर !!!

6 टिप्पणियाँ

देश बदल रहा है , देश की राजनीति भी बदल रही है , कभी नेताओं की पहचान खादी से हुआ करती थी लेकिन अब स्वरुप बदलता जा रहा है , कभी नेता जनता की आवाज़ हुआ करता था अब भीड़ में एक चर्चित चहरा बन कर रह गया है , अब का नेता आदर्शों की बातें नहीं करता , वो दूसरो पर कीचड़ उछालता है !
जब से देश की राजनीति सत्ता मात्र की पहचान बनी है तब से राजनीति के मायने ही बदल गए है , अब सत्ता के लिए राजनितिक पार्टियों को किसी भी चीज़ से परहेज़ नहीं है ,पार्टियाँ कभी बाहुबल का सहारा लिया करती थी , अब बाहुबलियों के सहारे सरकार चलाती है , जो कभी अपराधी हुआ करते थे अब उन्हें सम्मानित कहा जाता है , सत्ता की लगाम उनके हाथों में है जो ख़ुद बे लगाम है , क्या देश का भविष्य इन बाहुबलियों के हाथ में है ?
ये तो उनकी बात हुई जो कभी हत्या , लुट , फिरौती , अपरहण , जैसे कारनामें करके राजनीति में आयें है अब ज़रा उनकी भी बात कर ली जाए जो एक रंगीन सपनो की दुनिया से हकीकत की ज़मीन उतरें है लेकिन मंजिल का उन्हें भी कोई अंदाजा नहीं है , ये हैं बॉलीवुड के वो सितारे जो सिनेमा के रंगीन पर्दे पर जनता को हसीन सपने दिखाते है , ये वो हसीन चहरा है जो पर्दे पर हर रोज़ बिकता है , अपनी अदाओं से दिल जीत लेते है , अपने हुस्न से दीवाना बना देते है , ये इनका पेशा है अपने पेशे में ये बखूबी से उतर जाते है , लेकिन क्या ये जनता के दर्द को समझ सकेंगे ? उनकी परेशानियों का एहसास है इनको ? कब तक ये जनता की आखों यूही धुल झोकते रहेंगे ???
पार्टियाँ चाहे जो भी हो , बॉलीवुड के सितारों की जमात हर जगह है , ये अपने फ़र्ज़ के साथ कितना इन्साफ करते है ये सभी जानते है ? चाहे बात धर्मेन्द्र की हो या गोविंदा की , या अन्य किसी अभिनेता से बने नेता की ...सभी की एक ही परेशानी है ...वक्त नहीं है ?
जनता ने इन्हे अपना प्रतिनिधि तो बना दिया लेकिन भूल गए की रंगीन सपने सिर्फ़ पर्दों पर ही अच्छे लगते है , इन जनप्रतिनिधियों को शायद ये भी ना पता हो के संसद निधि कहाँ पर खर्च की जाती है या की जाती भी है या नहीं ? जनता ने जब इनको संसद तक पंहुचा ही दिया है तो फ़िर वापस अपने छेत्र में क्यूँ देखना चाहती है ???
दक्षिण में फिल्मी कलाकारों को भगवान् की तरह पूजा जाता है जहाँ की राजनीति रंगीन पर्दे से हो कर गुज़रती है , जहाँ जो कलाकार की ज़ियादा फिल्में हिट है वो उतना बड़ा नेता बन जाता है , अब तो ये भी ख़बर मिल रही है की फिल्मों की दुनिया से निकल कर अपने राज्य जी जनता का दुःख दर्द बाटने के लिए चिरंजीवी भी एक पार्टी बनने जा रहे है , ये तो वक्त ही बताएगा की उनकी कितनी फिल्में हिट है ???
देश की राजनीति की इस नई तस्वीर में वो चहरे भी शामिल है जो यूवा है कुछ कर गुजरने की चाहत भी रखते है लेकिन संसद के शोर में उसकी आवाज़ कहीं दब कर रह जाती है ,
उनको सुनने ही ज़हमत कोई नहीं उठाना चाहता है , उनके विचार तो है लेकिन पार्टी की गाइड लाइन से भटकने का अंजाम भी वो जानते है ???
इन सब के बीच सभी पार्टियाँ अपनी अपनी गिनती बढाने में लगी हुई है , उन्हें इससे मतलब नहीं है के जीतने वाला कौन है बस गिनती बढ़ना चाहिए , क्या पता कब विस्वास मत के लिए उनकी ज़रूरत पड़ जाए ? जनता तो बेचारी मासूम है किसी के भी बहकावे में आ जाती है , चिकना चहरा , एक दो फिल्मी डायलाग , और क्या वोट तुम्हारा ???
आज ये सोचने की ज़रूरत है की आधी बोतल शराब से या फ़िर के कुल्हे मटकाते किसी कलाकार के हाथों में क्या हम देश की बाग़ दौड़ सौपने जा रहे है ? क्या इस देश की कमान उनके हाथों में होंगी जिनके ख़ुद के हाथ खून से रंगे हुए है ? क्या यही लोकतंत्र है ? अगर हाँ ... तो तमाशा देखते देखते हम ख़ुद एक दिन तमाशा बन जायेंगे और लोकतंत्र की हत्या और बलात्कार होते देखने में ज़ियादा वक्त नहीं लगेगा ???

Friday, August 15, 2008

ऐं ज़िन्दगी ...

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ऐं ज़िन्दगी ,

तू मुझे कहीं दूर लेके चल !

जहाँ सिर्फ़ मैं हूँ , और मेरी तन्हाई हो !

न कोई रौशनी , न कोई परछाई हो !

ऐं ज़िन्दगी तू मुझे कहीं दूर लेके चल !!

मुझे दुनिया का नहीं , अपनों से डर है ,

हज़ार चहरे है लेकिन , हमदर्द कोई नहीं है !

कुछ है अगर तो सिर्फ़ मेरी तन्हाई है ...,

ऐं ज़िन्दगी , तू मुझे कहीं दूर लेके चल !!

अब तो ये आरज़ू है के मैं गुमनाम हो जाऊँ ,

न किसी के ज़िक्र में आऊं न ज़हन में आऊं !

न किसी को खोने का ग़म हो , न पाने की हसरत ,

बस लगता है , खामोशी से ज़मी ओढ़ के सो जाऊं !!

ऐं ज़िन्दगी , तू मुझे कहीं दूर ...लेके चल ......

Wednesday, August 13, 2008

मेरे मन को भाया , मैं कुत्ता काट के खाया ...

13 टिप्पणियाँ


दिल्ली में लावारिस कुत्तों को खाना खिलने पर जुर्माना किए जाने की ख़बर ने मुझे कुत्तों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है , अब बेचारे वफादार इमानदार बेजुबान लावारिस कुत्तों का क्या होगा ? खाना नहीं मिलने पर वो कहीं भूक हड़ताल पर तो नहीं बैठ जायेंगे ? इस तरह से लावारिस कुत्तों पर खाना बैन करना कितना उचित है ? कहाँ है मेनका गाँधी ?

चलिए ये तो बात हुई देश की राजधानी के कुत्तों की बात , अब बात करते है राज्य के कुत्तों की , छत्तीसगढ़ को तो आप जानते ही होंगे ? अरे वोही जहाँ नक्सली पाए जाते है ? पहचाना ? हम्म ...अब ठीक है .... अब आगे बढ़ते है ............. छत्तीसगढ़ के सबसे प्रभावित नक्सली छेत्र बस्तर में केन्द्र सरकार ने नक्सलियों से निपटने के लिए बहुत सी बटालियन भेजी थी , जिसमे सी आर पी ऍफ़ , नागा , मिजो ,आदि शामिल है , जिसमें से कुछ अभी भी मौजूद भी है .... अब मुद्दे पर आ जाया जाए ..... अपन है झोला छाप पत्रकार , खबरों की छानबीन करते रहना है अपना काम , एक दिन झोला उठाके चल दिए बस्तर , वहां हमे नागा बटालियन के केम्प में जन था , तो चल दिए ...... जैसे ही कैंप के मुख्य द्वार पर पहुंचे ... एक नागा के सज्जन टू स्टार ने हमारा स्वागत किया , हम गाड़ी से उतर के उससे बात कर ही रहे थे की अचानक हमारी नज़र जंगल की तरफ गई , दूर जंगल की तरफ़ से नागा के पाँच- छे जवान छोटी कद काठी , गठीला बदन , हाथों में फरसा नुमा हथियार चार जवान एक एक टांग पकड़े लिए आ रहे है किसी की ? पहले तो कुछ समझ में नहीं आया ? क्या है ? धीरे धीरे जवान नजदीक आने लगे तस्वीर कुछ साफ़ होने लगी ...अरे ...हिरन .....नहीं यार ... क्या है ये ....????.....तभी साथ में खड़ा टू स्टार उन जवानों से अपनी भाषा में कुछ कहता है ...मुझे समझ में नही आया ? लेकिन लगा के उन्हें वहीँ रुकने को कह रहा है ? लेकिन तब तक वो जवान नजदीक आ गए थे ...अरे ये क्या ?????.... कुत्ता ......

ये तो आखों देखा हाल है , बस्तर के लोगों ने मुझे एसा वाक्या सुनाया के हँस हँस के पेट दुखने लगा ... आप भी सुनेगे ....अच्छा लो ... एक बार हुआ क्या के ..नागा के कुछ आठ - दस जवान एक कुत्ते के पीछे लग गए ...कुत्ता सयाना था वो जनता था ये नागा भाई लोग है छोडेंगे नहीं , वेसे भी बस्तर के कुत्ते नागा बटालियन को देख के भागने लगते है , अब वो भी भगा खूब भगा ... नागा भी भागे खूब भागे ... भागते भागते नागा भाइयों ने कुत्ते को घेर लिया ... कुत्ता परेशान अब क्या करे ??? जान खतरे में है ... पास में ही एकसे से , से जान बचने के लिए कुवें में कूद कर आत्महत्या कर ली ...लेकिन नागा बटालियन के हाथों नहीं आया .....

अब बस्तर में ये हालात हैं की जहाँ जहाँ नागा बटालियन थी वहां वहां कुत्ते नहीं पाए जाते है , लेकिन जिस समस्या से निपटने के लिए ये बटालियन आई थी वो तो वेसे की वेसी ही है , कुत्ते आज भी नागा बटालियन को देख कर डरते है लेकिन नक्सली नहीं !!!

खैर ... नक्सलियों se ये बटालियन निजाद तो नहीं दिला सकी लेकिन ... किसी चीज़ से ज़रूर दिला सकती है ,

Sunday, August 10, 2008

भारत हमको जान से प्यारा है ...

12 टिप्पणियाँ
मुझे गर्व है के मैं भारत में जन्मा हूँ , वो भारत जिसने बिना किसी भेद भाव के , न किसी जात पात के , मुझे स्वीकार किया है , आज़ाद भारत की आज़ाद हवाओं में खुली साँस लेकर मेरी छाती और भी चौड़ी हो जाती है , मेरा बचपन इसकी सोंधी मिट्टी के बीच गुज़रा जिसकी खुशबु से आज भी देश महकता है , वो भारत जिसकी छाती पर किसान अपने माथे का पसीना बहा कर फसल उगते है , वो भारत जिसकी मिट्टी को जवान अपने माथे से लगते है , वो भारत जिसने कभी हिंदू मुस्लिम सिख इसाई का भेद नहीं किया , वो भारत जिसकी शान में कहते कहते न जाने कितने बरस बीत जाए ... उस भारत की ज़मी , मेरी कर्म भूमि , सच में मेरी जान है , मेरी हर साँस , मेरे देश , तुझपर कुर्बान है !

मुझे अफ़सोस है , मेरे देश को ये किसकी नज़र लग गई है , देश के रखवाले ही देश का सौदा करने में लगे है , मेरे अपने ही मेरे खून के प्यासे हो गए है , पहले तो ऐसे नहीं थे , किसने उनके दिल में ये ज़हर घोल दिया है , कभी मन्दिर की घंटियाँ , अज़ान सुना करते थे , अब ये चीख पुकार , दर्द कहार , ये आंसू जिंदगी में कैसे आ गए , कोई तो है जो अब भी हमे जुदा करना चाहता है कुछ अपने भी है और कुछ पराये भी , आख़िर कौन है वो ???
जिसकी साजिश का हम शिकार हो रहे है , वो भी अपने ही है लेकिन अपने स्वार्थ के तले इस कदर दब गए है के ख़ुद के अस्तित्व को बचाने के लिए हमे अलग करना चाहते है ,
मुझे कुछ नहीं चाहिए ...... बस मुझे मेरा भारत लौटा दो ...जिस पे मुझे गर्व है ....

भोक्वाये ब्लागर कृप्या ध्यान दें .....

13 टिप्पणियाँ

1. क्या आप के ब्लॉग को कोई नहीं पढ़ रहा है ?



२ क्या पढ़ने के बाद कोई टिपण्णी नहीं कर रहा है ?



३ क्या आप को लगने लगा है के आप को लिखना नहीं आता है ?
४ क्या आप को लगता है के आप से अच्छा स्त्रियाँ लिखती है ?



५ क्या आप को लगता है के सारी टिप्पणियाँ स्त्रियाँ ही ले जा लेती है ?



६ क्या आप सोचते है के आप स्त्री होते तो ही अच्छा होता ?
७ क्या आप सारा गुस्सा की बोर्ड पर ही उतार रहे है ?
८ क्या आप हीन भावना से ग्रस्त हो रहे है ?



९ क्या आप को किसी को काटने का मन करता है ?



१० क्या आप भोक्वा गए है ???



*** ऐसे लोग निराश ना हो ? तुंरत मिले ...किससे ? ...डाक्टर राज ...डाक्टर साहनी ...डाक्टर मुल्की ...से नहीं भाई साहब ... किसी दुसरे भोक्वाए ब्लागर से ...और अपने मन की ज्वाला ठंडी कर लें ...सुना है के बदन में जब आग लगी होता है तो पता नहीं धुवाँ कहाँ कहाँ से निकलता है ? एक दुसरे को टिपण्णी देकर पिछवाड़े में पानी डालिए ...



*** इससे भी रहत न मिले तो एक और नुस्खा है मेरे पास ? अब मैं कौन ??? मैं भोक्वा राम रहीम बिना मुछी दाढ़ी का मुल्ला ... बिना धोती कुरते का पंडित ...नाच न जानू और आँगन टेढा ... फोकट में सलाह बाट्ता भूके पेट ही सो जाता ...नुस्खा लो .....



१ नर से बन जाओ तुम नारी ...लिंग अपना स्त्री कर लो ...



२ सोलह सोलह श्रृंगार करके ...अपनी छवि को जोड़ लो ...



३ सेक्स सेक्स की बाते लिखना ...मर्दों को तुम गली बकना ...



४ बिना कुछ जाने पहचाने ... किसी के फटे में टांग आड़ाना .

५ कर लेना तुम सब को वश में ... बुड्ढों की भी टिपण्णी पाना ...


६ एक से चार चार तक ... सारे खम्बो को हिलाना ...


७ और कभी अगर दुखती नस पर ...हाथ तुम्हारे रखदे तो ...


८ असंसदीय भाषाओं से ... उसका बैंड बजा देना ...


९ क्या बुड्ढे क्या यूवा ... सब तेरा साथ निभाएंगे ...


१० एक एक करके ये सारे .... खूब टिप्पणीयाँ करते जायेंगे ....

खूब टिप्पणीयाँ करते जायेंगे .....खूब टिप्पणीयाँ करते जायेंगे ...............

********************************************************************

नोट :- बाप भाई लोग ... नाराज़ नहीं होनेका है ... खाली टाइम में कोई काम नहीं था तो ये बकवास कर डाली ... बुरा नहीं मानने का है ..ठीक .... इंजॉय सन्डे ...

Saturday, August 9, 2008

चिकनी चिकनी प्यारी प्यारी ...

7 टिप्पणियाँ
दुबली पतली नाज़ुक नाज़ुक
चिकनी चकनी प्यारी है ,
गोल गोल सी बड़े बड़े से
हाथों में नहीं आती है ,
छोटा सा एक छेद है बीच में
उसमे ऊँगली भी नहीं जाती है ,
लेकिन प्यारी सच कहता हूँ
कितने रंग दिखाती है ,
जैसे ही आता है चुनाव
तेरी मांग बढ़ जाती है ,
अपने इस छोटे से बदन में
बडों बडों को समाती है ,
करती है जब तू अंग प्रदर्शन
सब के होश उड़ाती है ,
बड़े बड़े नेताओं को तू
नंगा करते जाती है ,
तेरी सात रुपयों की कीमत
सात लाख हो जाती है ,
टीवी चैनल में तू दिख के
उसकी शोभा बढाती है ,
सारे नेताओं की किस्मत
तेरे अन्दर ही समाती है ,
अगर कभी तू दिख जाती है तो
सब का बैंड बजाती है ,
सच कहता हूँ प्यारी सी.डी. तू
कितने रंग दिखाती है ...

Friday, August 8, 2008

खबरी चैनलों की माँ की ..बिप ...

3 टिप्पणियाँ

देश में खबरी चैनलों की तादात इस तेज़ी से बढ रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है के अपने आप को सबसे तेज़ कहने वाला चैनल भी पीछे छुट गया है ? लगातार चैनल आ रहे है और बहस का मुद्दा भी बन गए है , संपादक स्तर के लोग टीवी न्यूज़ चैनलों को अपने संपादकीय में स्थान दे रहे है और जी भर के माँ बहन एक कर रहे है , ये बुद्धिजीवी न्यूज़ चैनल को या तो बिन बिहाई माँ समझते है या वो वैश्या जो सरे बाज़ार अपने जिस्म को बेचती है ? बिना अपने अन्दर झांके दूसरो पर कीचड़ उछालने का काम बखूबी करते है , शायद सोचते होंगे उसकी शर्ट मेरी शर्ट से सफ़ेद कैसे ???
और तो और एक बड़ा सा ब्लॉग भी बना दिया गया है मीडिया की .. बिप.. मारने के लिए , जिसका जी करे उतारो और ..बिप .. मार लो ? ..बिप.. मारने का मौका कोई भी नहीं छोड़ना चाहता है इसके लिए सब को जल्दी पड़े रहती है , सबसे बड़ा सवाल ये है की हम अच्छी चीजों को आसानी से नहीं अपनाते है लेकिन बुराई को अपनाने में हमे ज़ियादा वक्त नहीं लगता है .... मुंबई का डॉन कौन ..भिकू भाई ..बोलने में टाइम नहीं लगता है ..लेकिन किसी फिल्म में बुराई पर अच्छाई की जीत किस तरह हुई ये भूल जाते है ?
चलिए में सीधे अपनी औकात में आ जाता हूँ बात न्यूज़ चैनलों की हो रही थी ... जो दिखता है वो बिकता है ..और देखने वाला ..बिप .. है जो उसे देखता है , अब अगर आप देख रहे हो उस चैनल की टी आर पी बढा रहे हो तो वो न्यूज़ चैनल क्या करे ? ..बिप.. कौन है चैनल या हम ? हमे की बलात्कार से पीडित महिला की न्यूज़ का रीक्रिएशन देखना अच्छा लगता है , हमे नाग नागिन की रास लीला देखना अच्छा लगता है , शेर और शेरनी का इश्क हमे अच्छा लगता है ,
..बिप.. भुत ..और भभूत .. के हम तो दीवाने है जब भी दिखाओ हम देखेंगे ?
देखेंगे भी और गली भी बकेंगे , आप देखना बन कर दो वो दिखाना बंद कर देंगे ? में कोई खबरी चैनलों की पैरवी नहीं कर रहा हूँ में ये बताना चाहता हूँ की हम ये देखते है इसलिए ये देखने को मिलता है क्यूंकि ये हम देखना चाहते है , उनकी टी आर पी बढा रहे है और वो नंगा नाच कर रहे है ,
मुझे ख़बरों का सब से बड़ा बलात्कारी चैनल इंडिया टीवी लगता है और रजत शर्मा सबसे बड़ा ..बिप.. बिप.. बिप ..बिप ..बिप .. है लेकिन क्या करे चैनल टी आर पी में नम्बर वन है , देश में अच्छे पत्रकार और पत्रकारिता अभी भी ज़िन्दा है और हमे इसे ज़िन्दा रखना है इसके लिए हमे उन लोगों को प्रोत्साहित करना होगा जो ज़मीन से जुडी पत्रकारिता करते है ,
जैसे एन डी टी वी इंडिया .... खबर वो ही जो सच दिखाए ...
 

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